जमुई में 19 सितंबर को दो नाबालिगों के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने एनडीए सरकार को कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। पुलिस ने मामले में सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है और जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है।
इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कुछ समय पुराना बयान फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर कहा था कि यदि रात में घूमने के दौरान किसी महिला या लड़की को कोई छू दे, तो वह अगली सुबह इस्तीफा दे देंगे। अब इसी बयान को लेकर विपक्ष उनसे सवाल कर रहा है।
रोहिणी आचार्य ने मांगा इस्तीफा
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जमुई की घटना के बाद उन्हें अपने पुराने बयान के मुताबिक इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ने स्वयं महिला सुरक्षा को लेकर इतनी कड़ी बात कही थी, तो अब उस कसौटी पर अपनी सरकार को क्यों नहीं परखा जा रहा है।
विपक्ष का तर्क है कि मंच से किए गए बड़े दावों की असली परीक्षा जमीन पर होती है। जमुई की घटना को विपक्ष इसी संदर्भ में सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है। वहीं, सरकार की ओर से मामले में पुलिस कार्रवाई जारी है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात सामने आई है।
बयान से ज्यादा अब जवाबदेही का सवाल
सम्राट चौधरी का पुराना बयान अब केवल एक राजनीतिक बयान नहीं रह गया है, बल्कि विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का प्रमुख आधार बन गया है। राजनीति में अक्सर पुराने बयान उस समय फिर सामने आते हैं, जब मौजूदा घटनाक्रम उनसे जुड़ने का अवसर देता है। जमुई प्रकरण में भी यही हुआ है—एक पुराना दावा और वर्तमान घटना आमने-सामने खड़े कर दिए गए हैं।
हालांकि, किसी आपराधिक घटना की जिम्मेदारी और राजनीतिक जवाबदेही के सवाल अलग-अलग स्तरों पर तय होते हैं। जमुई मामले में आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है। इसी के साथ यह मामला बिहार में महिला एवं बाल सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सत्ता की जवाबदेही पर नई राजनीतिक बहस का कारण बन गया है।


